हनुमान जी के बाएं पैर में सिंदूर लगाने के 5 चमत्कारी फायदे

 

हनुमान जी के बाएं पैर में सिंदूर लगाने के 5 चमत्कारी फायदे

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हनुमान जी के बाएं पैर में सिंदूर लगाने की परंपरा भारतीय भक्ति संस्कृति में सदियों पुरानी है। भक्त मानते हैं कि हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाना केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि विशेष फल देने वाला उपाय है।

खासतौर पर बाएं पैर में सिंदूर लगाने को लेकर एक अलग मान्यता प्रचलित है। ऐसा माना जाता है कि इससे शत्रु बाधा, कोर्ट-कचहरी के मामलों और नकारात्मक शक्तियों से राहत मिलती है।

इस लेख में हम आपको इस परंपरा से जुड़ी पौराणिक कथा, मान्यताएं, सही विधि और आवश्यक सावधानियां विस्तार से बताएंगे।

इस लेख में क्या पढ़ेंगे (Table of Contents)

  • सिंदूर चढ़ाने की पौराणिक कथा
  • बाएं पैर में सिंदूर लगाने की मान्यता
  • बाएं पैर बनाम दाएं पैर में सिंदूर
  • सिंदूर लगाने की सही विधि
  • सावधानियां
  • निष्कर्ष

सिंदूर चढ़ाने की पौराणिक कथा

एक बार हनुमान जी ने माता सीता को अपनी मांग में सिंदूर लगाते देखा। उन्होंने कारण पूछा तो माता सीता ने बताया कि यह श्रीराम की दीर्घायु के लिए किया जाता है।

यह सुनकर हनुमान जी ने सोचा कि यदि थोड़े से सिंदूर से प्रभु राम दीर्घायु होते हैं, तो पूरे शरीर पर सिंदूर लगाने से वे अमर हो जाएंगे। इसी भक्ति भाव से हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लेप लिया था।

यह प्रसंग सुंदरकांड में वर्णित है और आज भी इसी कारण हनुमान जी की मूर्तियों पर सिंदूर चोला चढ़ाया जाता है।

बाएं पैर में सिंदूर लगाने की मान्यता

पारंपरिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी के बाएं पैर में सिंदूर लगाने के विशेष प्रभाव माने जाते हैं। भक्त निम्नलिखित उद्देश्यों से यह उपाय करते हैं:

  • शत्रु बाधा से मुक्ति: शत्रुओं द्वारा उत्पन्न परेशानियां शांत होती हैं।
  • कोर्ट-कचहरी में राहत: कानूनी मामलों और विवादों में सकारात्मक परिणाम मिलने की मान्यता है।
  • नकारात्मक शक्तियों से रक्षा: भूत-प्रेत बाधा, तंत्र-मंत्र और बुरी नजर से सुरक्षा मिलती है।
  • मानसिक बल: भय और चिंता दूर होकर आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • बाधाओं का नाश: रुके हुए कार्यों में आ रही अड़चनें दूर होती हैं।

ध्यान रहे कि ये सभी मान्यताएं परंपरा और लोक आस्था पर आधारित हैं, जिन्हें भक्त श्रद्धा भाव से अपनाते हैं।

बाएं पैर बनाम दाएं पैर में सिंदूर

कई भक्त पूछते हैं कि दाएं और बाएं पैर के सिंदूर में क्या अंतर है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार:

  • दाएं पैर में सिंदूर: मनोकामना पूर्ति, सुख-समृद्धि और नए कार्यों में सफलता के लिए लगाया जाता है।
  • बाएं पैर में सिंदूर: शत्रु शमन, नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं को दूर करने के लिए लगाया जाता है।

कुछ स्थानों पर भक्त दोनों पैरों में सिंदूर लगाकर पूर्ण चोला भी चढ़ाते हैं, जिससे संपूर्ण सुरक्षा और सिद्धि की कामना पूरी होने की मान्यता है।

सिंदूर लगाने की सही विधि

घर पर या मंदिर में हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने के लिए यह विधि अपनाई जाती है:

  1. मंगलवार या शनिवार का दिन चुनें, ये हनुमान जी के प्रिय वार माने जाते हैं।
  2. शुद्ध सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर लेप तैयार करें।
  3. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  4. सबसे पहले हनुमान अष्टक या हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  5. अनामिका उंगली से हनुमान जी के बाएं पैर पर सिंदूर लगाएं।
  6. “ॐ हं हनुमते नमः” मंत्र का जाप करते हुए श्रद्धा भाव से यह उपाय करें।
  7. अंत में हनुमान जी की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

सावधानियां

यह उपाय करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:

  • सिंदूर हमेशा शुद्ध और सात्विक हो।
  • मंदिर के नियमों और पुजारी के मार्गदर्शन का पालन करें।
  • यह उपाय श्रद्धा और सकारात्मक भाव से ही करें, भय या स्वार्थ से नहीं।
  • यह एक पारंपरिक आस्था है, इसलिए इसे अंधविश्वास न मानकर श्रद्धा के रूप में अपनाएं।

निष्कर्ष

हनुमान जी के बाएं पैर में सिंदूर लगाना भक्तों की गहरी आस्था और परंपरा का हिस्सा है। यह उपाय शत्रु बाधा, कानूनी परेशानियों और नकारात्मक शक्तियों से राहत पाने के लिए वर्षों से प्रचलित है।

सच्ची श्रद्धा, सही विधि और नियमित भक्ति के साथ यह परंपरा भक्तों के जीवन में सकारात्मकता और सुरक्षा का भाव लाती है।

जय हनुमान, जय संकटमोचन!

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