
श्रीहनुमत् स्तवन/Shri Hanuman Stavan
सोरठा प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ज्ञानघन । जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर ॥१॥ अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम् । दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्…
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